अयोध्या में भूमि पूजन से पहले बोले ओवैसी बाबरी मस्जिद एक मस्जिद है और हमेशा रहेगी

अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमि पूजन होने जा रहा है. खबरों की मानें तो 5 अगस्त को प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी अयोध्या जाकर इस पूजन में हिस्सा लेंगे. राम मंदिर को लेकर चल रही तमाम अटकलों के बीच अखिल भारतीय मजलिस-ई-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी एक बड़ा बयान दिया है. ओवैसी ने कहा कि बाबरी मस्जिद हमेशा एक मस्जिद बनी रहेगी.

सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आउट लुक को दिए एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि पीएम मोदी को यह बात साफ करना चाहिए कि वो अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन में एक प्रधानमंत्री के तौर पर जा रहे है या फिर व्यक्तिगत रूप से.

Owaisi

इसे लेकर जब ओवैसी से सवाल किया गया है कि अयोध्या में राम मंदिर को लेकर चल रहे ग्राउंड-ब्रेकिंग समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं. सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले पर आपकी आलोचना और सवाल जगजाहिर है. तो क्या अब आठ महीने के बाद आपने कोर्ट के फैसले को स्वीकार कर लिया है?

इस पर उन्होंने कहा कि अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद एक मस्जिद है और यह हमेशा एक मस्जिद जैसी ही रहेगी. ऐसा मेरा विश्वास है और मेरे विश्वास को मुझसे या किसी से भी दूर नहीं किया का सकता है. उन्होंने आगे कहा कि हम आने वाली नई पीढ़ी को यह बताते रहेंगे कि बाबरी एक मस्जिद है जिसे ढहा दिया गया था.

ओवैसी ने सवाल करते हुए कहा कि क्या 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद नहीं ढहाई गई थी? मुझे लगता है यह फैसला नहीं आता. इतिहास में याद रखा जाएगा कि दिसंबर 1949 में क्या हुआ था. किस तरह मस्जिद में चोरी से प्रतिमाएं रख दी गई थीं और फिर 1992 को मस्जिद ढहा दी गई.

उन्होंने आगे कहा कि जहां तक मुस्लिमों और इंसाफ पर भरोसा रखने वालों की बात है. तब हम नई पीढ़ी को बताते रहेंगे कि मस्जिद हमारी थी, जिसका विध्वंस कर दिया गया था. अगर हमारी आवाज दबाई जाती है तो यह मुद्दा नहीं हैं. हम इसे दूसरे अंदाज में बताते रहेगे.

वहीं जब उन से सवाल किया गया कि पीएम 5 अगस्त को राम मंदिर के शिलान्यास के लिए अयोध्या जा रहे है. क्या इस दौरे में कोई राजनैतिक संदेश छुपा है?

तब ओवैसी ने कहा कि पीएम को देश की जनता को बताना चाहिए की वो अयोध्या पीएम के रूप में जा रहे है या फिर आम नागरिक की तरह जा रहे है. पीएम होने के नाते वो सभी धर्मों और लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो किसी भी धर्म में यकीन नहीं रखते हैं. ऐसे में उनका पीएम के रूप में जाना उनकी शपथ के विरुद्ध होगा.

साभार- जनसत्ता

Leave a Comment