पंचायत चुनाव 2021: क्या ये है अंत की शुरुआत? अयोध्या, वाराणसी और मथुरा में BJP साफ़

BJP lose panchayat elections यूपी में जिला पंचायत की (UP Zila Panchayat Result 2021) 3050 सीटों पर हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी पहले नंबर पर है। बीजेपी को अयोध्या, वाराणसी और मथुरा में भी शिकस्त झेलनी पड़ी है। ट्विटर पर भी बीजेपी की यहां हार ट्रेंड हो रही है।

उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पूरे जोर-शोर से उतरी थी। संगठन से लेकर विधायक, सांसद और मंत्रियों ने चुनाव में ताकत झोंकी। लेकिन नतीजों में बीजेपी को करारा झटका लगा है। बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात तीन जगहों पर हार रही।

पिछले चार दशकों के दौरान ये ऐसे प्रतीक हैं, जिन्हें पार्टी के बढ़ते ग्राफ से जोड़कर देखा जाता रहा है। हम बात कर रहे हैं अयोध्या, काशी और मथुरा की। लेकिन जिला पंचायत चुनाव के नतीजों में बीजेपी को इन तीनों जिलों में मात मिली है। बीजेपी की हार के बाद ट्विटर पर बहस छिड़ी है और कई यूजर्स पार्टी को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।

अयोध्या जिला पंचायत की 40 में से 24 सीटों पर मुख्य विपक्षी पार्टी सपा जीती है। वहीं वाराणसी में भी 15 सीटों पर सपा समर्थित जीते हैं। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘बीजेपी की अयोध्या, वाराणसी और मथुरा जिला पंचायत में भारी हार हुई है।

अयोध्या की 40 में से 8, वाराणसी की 40 में से 7 और मथुरा की 33 में से 8 सीटों पर बीजेपी जीती है। ये शहर बीजेपी के सांप्रदायिक एजेंडे के केंद्र में हैं। दीवार पर लिखी इबारत साफ है। योगी और बीजेपी की 2022 के चुनाव में करारी शिकस्त मिलेगी।’

सतीश कुमार नाम के ट्विटर यूजर ने एनबीटी ऑनलाइन के आर्टिकल को ट्वीट करते हुए लिखा, ‘बीजेपी अयोध्या, मथुरा और वाराणसी में हार गई है। यूपी में राष्ट्रपति शासन लगने वाला है। कंगना को खास तौर से धन्यवाद। देश और यूपी के हिंदू अब सच में जाग चुके हैं।’

ट्विटर यूजर अनु वर्गीज ने लिखा, ‘क्या यह एक अंत की शुरुआत है? क्या यूपी बदलेगा? बीजेपी अयोध्या, वाराणसी और मथुरा में पंचायत चुनाव हार गई है। विपक्ष को यूपी में जीतने के लिए बीजेपी से बेहतर विलेन बनना होगा।

समीर नाम के ट्विटर यूजर ने कॉमेंट किया, ‘तीन पवित्र शहरों वाराणसी, अयोध्या और मथुरा के पंचायत चुनाव में बीजेपी बड़े अंतर से हारी है। उत्तर प्रदेश के लोग धीरे-धीरे महसूस कर रहे हैं कि धार्मिक गुंडागर्दी शासन चलाने का विकल्प नहीं है। आप हर संकट की घड़ी में अपने तरीके से संपत्ति जब्त नहीं कर सकते।’

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