रामदेव अपनी दवा को बेचने के लिए भ्रम फैला रहे हैं

किसी स्वस्थ समाज में “बाबा रामदेव” जैसा व्यक्ति जेल में होता

किसी स्वस्थ समाज में “बाबा रामदेव” जैसा व्यक्ति जेल में होता , केवल इस कारण कि देश में महामारी ऐक्ट लागू है जिसके अंतर्गत चिकित्सा और रोग को लेकर भ्रम फैलाने पर मुकदमा दर्ज करके उस व्यक्ति को जेल में डाल देने का स्पष्ट प्रावधान है। मगर हो क्या रहा है ? कोरोना के इलाज का समूचा प्रिस्क्रिप्शन केन्द्र सरकार द्वारा जारी जिस प्रोटोकाॅल के अंतर्गत होता है बाबा रामदेव उसी को विफल बता रहा है।

हैरानी की बात यह है कि नैशनल टेलीवीजन पर बैठा यह शख्स पूरी दुनिया में प्रमाणित एलोपैथिक मेडिकल साइंस को “स्टूपिड और दिवालिया” साइंस बता रहा है , कोरोना के इलाज के लिए दी जाने वाली सारी दवाओं को विफल बता रहा है। मतलब कि कोरोना मरीज़ों के इलाज के लिए मोदी सरकार की बनाई गाइडलाइन और प्रोटोकाल को बाबा रामदेव सीधे सीधे विफल बता रहे हैं और देश में 3•67 करोड़ कोरोना के मरीज़ों में से 99% मरीज़ों को उसी प्रोटोकाल से ठीक कर चुके एलोपैथिक मेडिसीन को बेकार बता रहे हैं।

अपनी दवा बेचने की लालच में ऐसा भ्रम और गलतफहमी फैलाने पर यदि कोई स्वस्थ देश होता तो रामदेव अंदर होते और पतांजली को सील कर दिया जाता।

मगर ठहरिए , बाबा रामदाव अपने ही लगभग खरीद लिए गये न्यूज़ चैनल “आजतक” पर ठसक के साथ बैठ कर देश के दो सर्वश्रेष्ठ डाक्टर्स को मशविरा देता है कि “जब सीवियर हार्ट अटैक आए तो घर से अस्पताल जाते वक्त वह व्यक्ति अनुलोम विलोम करे तो वह बच जाएगा”
और बिक गये अरुण पूरी और चिकनी चमेली पत्रकार अंजना ओम कश्यप यह भी नहीं पूछतीं कि जिस व्यक्ति को सीवियर हार्ट अटैक आया हो वह कैसे इस स्थीति में रहेगा कि वह “अनुलोम विलोम” करेगा ?

अपने तमाम उत्पादों को सामने रखवा कर प्रचार के बीच रामदेव के ऐसे भ्रम फैलाने वाले बयानों पर “आजतक” को उसे धकिया कर बहस से बाहर कर देना चाहिए था और पुलिस को उसे फिर से “सलवार” पहनवा देना चाहिए था।

पर जो संस्थान बाबा रामदेव के दिए प्रचार से ही सांस लेता हो वह ऐसी हिम्मत कर पाएगा ? नहीं कल शाम 6 बजे चिकनी चमेली पत्रकार “अंजना ओम कश्यप” के “हल्ला बोल” में रामदेव ने जिस नीचता का प्रदर्शन किया और आईएएमए के दो पदाधिकारियों से जिस तरह की बहस की वह सभी को देखना चाहिए।

यह रहा पूरे प्रोग्राम का लिंक

दरअसल , बाबा रामदेव हों , कंगना रानावत हो , तीरथ सिंह रावत हों , साध्वी प्रज्ञा हों , गिरिराज सिंह या बिप्लब देव हों यह समाज के “आईटम नंबर” हैं जो देश की एक बहुत बड़ी आबादी को मुर्ख बनाए रखने के काम में संघ द्वारा लगाए गये हैं।

इनमें बाबा रामदेव का पूरा प्रयास केवल बिमारियों का चिकित्सीय आधार पर बँटवारा है , जिससे उनकी दवाईयों की बिक्री बढ़ जाए।

अपने एक इशारे पर देश की सरकार के तीन तीन मज़बूत और महत्वपुर्ण मंत्री , रक्षामंत्री , स्वास्थमंत्री और सड़क परिवहन मंत्री को अपने मंच पर बुलाकर वह “आईएमए” और “आईएमसीआर” जैसी संस्थाओं पर यही मनोवैज्ञानिक दबाव डाल रहे हैं कि वह इमेरजेन्सी और सर्जरी जैसी आपातकालीन बिमारी के अतिरिक्त शेष बिमारियों का इलाज बंद करके यह घोषित कर दे कि लोग इसका इलाज रामदेव की दवाओं से करें।

इससे देश में करोड़ों ओपीडी कर रहे डाक्टर्स उनकी अप्रमाणित दवाओं को अपने प्रिस्क्रिशन में लिखें जिससे उनका धंधा चोखा हो जाए।
कुल मिलाकर अपनी बाईं आँख को अपनी दाहिनी आँख की अपेक्षा 50 गुना बार अधिक फड़काने वाले रामदेव की यही योजना है कि , कोरोना , डाइबेटिक , ब्लडप्रेशर , हृदय , पेट के रोग , मस्तिष्क रोग , आईएनटी , अस्थमा , फेफड़े , किडनी , लीवर से संबन्धित सभी बिमारियों के इलाज पर उनका एकाधिकार हो जाए और इसे देश के तमाम मेडिकल संस्थान घोषित भी कर दें जिससे वह गोबर और पेशाब से इलाज कर सकें।

इतना बड़ा और बेहूदा ख्वाब एक सड़ गये समाज का एक बाबा ही देख सकता है और कोरोना के इलाज में अपनी जान पर खेल कर 3•5 करोड़ लोगों की जान बचाने वाले एलोपैथिक डाक्टर का “टर्र टर्र टर्र” कह कर मज़ाक उड़ा सकता है।

मेरी देश के सभी डाक्टर्स से अपील है कि इस बाबा ठगदेव के खिलाफ महामारी ऐक्ट और खुद को दी गयी डिग्री पर अपमानजनक टिप्पणी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएँ।

अपने दो कोरोना पाजिटिव संबन्धियों के इलाज के संदर्भ में मैंने इन डाक्टर्स को आईसीयू में संघर्ष करते देखा है , जिस कोविड आईसीयू के 100 मीटर दूर मरीज का सगा संबन्धी रहना चाहता था , उसी आईसीयू वार्ड में यह एलोपैथ डाक्टर्स और नर्स घुस कर कोविड मरीजों की सासों को आगे बढ़ा रहे थे।

वाकई उन पर अब हेलिकाॅप्टर से पुष्प वर्षा करना चाहिए और इनकी हिम्मत को सलाम करना चाहिए , क्युँकि इनके ही प्रयास से 3 करोड़ 62 लाख लोगों में से 3 करोड़ 59 लाख लोग स्वस्थ होकर घर पहुचे हैं।

उनके प्रति ऐसे अपमानजनक बयान पर यदि सरकार भी चुप है तो समझिए कि संघ के दीर्घकालिक एजेन्डे के लिए यह सरकारें क्या क्या नुकसान होने देना चाहती हैं।

यह और हास्यास्पद है कि दुनिया भर की बिमारियों के इलाज पर एकाधिकार के लिए प्रयासरत यह बाबा ठगदेव ने अपनी सफाई में कहा कि उसने “व्हाट्सअप” पर जो आया वह कहा।

हे ईश्वर देशवासियों की रक्षा करना। बाकी मैं इंडियन मेडिकल एशोसिएशन के महासचिव डाक्टर जयेश लेले से सहमत हूँ कि इस बाबा ठगदेव को दो थप्पड़ कानूनी और संवैधानिक रूप में लगाकर इनकी चिकित्सीय गतिविधियों पर रोक लगानी चाहिए। – Mohd Zahid

Disclaimer: इस पोस्ट को बिना एडिट किये सोशल मीडिया पर लेखक मोहम्मद ज़ाहिद की वाल से लेकर पब्लिश किया गया है, ये लेखक के निजी विचार हैं.

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