झटका: मोदीराज में JIO हुआ आबाद BSNL बर्बाद, BSNL के पास पैसा नहीं, 20 हजार कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की…

देश में चल रही बेरोजगारी की बहस के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. एक तरफ जहां देश का बेरोजगार युवा इन दिनों रोजगार के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज़ उठा रहा है वहीँ दूसरी तरफ सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल (BSNL) अपने 20 हजार कर्मचारियों को बेरोजगार करने की तैयारी कर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी ने अपनी सभी यूनिटों को खर्च घटाने के लिए निर्देश दिये है.

इसी के तहत 20 हजार कामगारों जो कंपनी के लिए कॉन्ट्रैक्टर के जरिये काम कर रहे पर छंटनी की तलवार लटकी हुई है. बीएसएनएल कर्मचारी संगठन के अनुसार कंपनी पहले ही 30 हजार कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को निकाल चुकी है. जबकि इन कर्मचारियों का एक साल से भी अधिक का वेतन बकाया है.

Bharat Sanchar Nigam Limited

कर्मचारी संगठन द्वारा बीएसएनएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर पी के पुरवार को चिट्ठी लिखी गई है जिसमें कंपनी की खराब होती वित्तीय स्थिति के बारे में बात की गई है. कंपनी में हाल ही में वीआरएस स्कीम लागू की गई थी लेकिन इसके बाद भी इसकी सेहत में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है.

मैनपावर की कमी से अलग-अलग शहरों में नेटवर्क में लगातार दिक्कत बनी रहती है. यूनियन का कहना है कि वीआरएस स्कीम के तहत बड़ी तादात में कर्मचारियों के चले जाने के बाद भी वर्तमान में काम कर रहे कर्मचारियों को वक्त पर वेतन नहीं मिल पा रहा है.

यूनियन ने बताया है कि पिछले 14 महीनों के दौरान 13 कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी वेतन न मिलने के चलते सुसा’इड कर चुके है. बीएसएनएल ने 1 सितंबर को सभी जनरल मैनेजरों को एक पत्र लिख कर कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों का खर्चा घटाने की कोशिश करने के लिए कहा है.

पत्र में कहा गया है कि ठेके के तहत काम करने वाले कामगारों को कम से कम काम पर रखा गए जिससे खर्चा घट सके. सीएमडी ने कहा है कि अपने-अपने जोन में  सभी जनरल मैनेजर खर्चा घटाने का रोड मैप तैयार कर भेजें.

वहीं पीटीआई से बात करते हुए बीएसएनएल एंप्लॉयज यूनियन के जनरल सेक्रेट्री पी अभिमानी ने बताया कि छंटनी की प्रक्रिया के तहत कंपनी 30 हजार कर्मचारियों को निकाल चुकी है.

अभिमानी ने कहा कि अब खर्च घ’टाने के निर्देशों के बाद कम से कम 20 हजार लोगों पर असर पडे़गा. उनकी नौकरियां पर तलवार लटक रही हैं. इससे पहले साल 2019 में वीआरएस के तहत कम से कम 79 हजार कर्मचारियों को घर बिठाया जा चुका है.

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