चीन के लोग भी इन चीनी कंपनियों के प्रोडक्ट्स को पसंद नहीं करते हैं. भारत में बढ़ रहा, लेकिन चीन में घटता जा रहा

भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा पर तनाव के बीच गलवान घाटी के पास दोनों देशों की सेना के बीच हुई हिं’सक झड़प और इसके बाद से ही जारी तनाव को अब दो महीने बीत चुके हैं. इसके बाद से ही देश भर में चीनी प्रोडक्ट्स के बायकॉट के मुहीम देश भर में छिड़ गई थी. इसी बीच भारत सरकार ने भी राष्ट्रीय सुरक्षा और प्राइवेसी का हवाला देते हुए चीन की 59 ऐप्स को देश भर में बैन कर दिया था.

पिछले दो महीनों के दौरान सोशल मीडिया पर चीनी प्रोडक्ट्स को बायकॉट करने की मुहिम काफी तेजी रही हैं. अब ऐप्स पर बैन लागू होने के बाद चीनी कंपनियों के स्मार्टफोन की बिक्री रोकने की मांग भी उठने लगी हैं.

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सोशल मीडिया पर पिछले लंबे समय से चीन की स्मार्टफोन कंपनियों का विरोध चल रहा है लेकिन यह सिर्फ सोशल मीडिया तक ही सीमित है क्योंकि भारत में चीन की स्मार्टफोन कंपनियों का मार्केट शेयर कम होने की जगह तेजी से बढ़ रहा है.

स्मार्टफोन मार्केट पर नजर रखने वाली काउंटरप्वाइंट की रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च) के दौरान चीन की 4 कंपनियों का मार्केट शेयर 55% था, जो इस साल की पहली तिमाही में उछल कर 73% पर पहुंच गया हैं. ये चार कंपनियां श्याओमी, ओप्पो, वीवो और रियलमी हैं.

यह कंपनियां भले ही चीन की हैं लेकिन एक बड़ा सच यह है कि इन्हें चीन में भी इतना पसंद नहीं किया जाता है जितना इन्हें भारत में पसंद किया जा रहा हैं. सिर्फ चीन ही नहीं ग्लोबल स्मार्टफोन मार्केट में तो इनकी हालत और भी ज्यादा खराब है.

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साभार- दैनिक भास्कर

इसका सीधा का मतलब तो यही हुआ कि चीन के लोग भी इन चीनी कंपनियों के प्रोडक्ट्स को खरीदना पसंद नहीं करते हैं. चीनी कंपनी हुवावे इकलौती ऐसी कंपनी है जिसकी चीन और ग्लोबल मार्केट में भी शेयर के मामले में हालत ठीक हैं. हुवावे ग्लोबल मार्केट में शेयर के मामले में दूसरे नंबर पर आती हैं.

लेकिन भारत में जबरजस्त शेयर रखने वाली श्याओमी, ओप्पो और वीवो की हालत चीन और ग्लोबल स्तर पर खराब होती जा रही है. इतना ही नहीं चीन में रियलमी को तो अन्य कंपनियों में गिना जाता है.

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साभार- दैनिक भास्कर

वहीं चीन में श्याओमी, ओप्पो और वीवो का मार्केट शेयर पिछले साल की पहली तिमाही में 49% था, जो वर्तमान साल की पहली तिमाही में गिरकर 43% पर आ गया.

वहीं भारत के मार्केट की बात की जाए तो यहां पर इन चीनी कंपनियों की बहार चल रही हैं. देश के कुल स्मार्टफोन मार्केट में से 73% पर चीनी कंपनियों का ही कब्जा है. सिर्फ एक दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग ही ऐसा ब्रांड है जो टॉप-5 में जगह बना पाया हैं. हालांकि सैमसंग भी पिछले साल दूसरे नंबर पर थी जो अब तीसरे पर पहुंच गई हैं.

साभार- दैनिक भास्कर

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