दिल्ली हाईकोर्ट ने बकरीद पर जानवरों को मारे जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से किया इंकार

ईद-उल-अजहा में अब सिर्फ कुछ ही दिन बचे हुए है. लेकिन कोरोना महामारी और लॉकडाउन के चलते बकरीद पर होने वाली कुर्बानी को लेकर कई राज्यों में कई तरह की पाबंदियां देखने को मिल रही है. इसी बीच हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें बकरीद पर जानवरों को मा’रे जाने का विरोध किया गया था लेकिन हाई कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से ही इनकार कर दिया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बकरीद पर जानवरों का कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से व’ध करने का आरोप लगाते हुए कुछ विशिष्ट लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करने वाली याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में बुधवार को दायर की गई थी. लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया.

delhi high court

याचिका में कहा गया था कि बकरीद के मौके पर जानवरों के व’ध के बाद उनके अपशिष्ट को यमुना नदी में फेंक दिया जाता है, जिससे नदी प्रदूषित होती है.

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जैन की एक पीठ ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण यमुना नदी के प्रदूषण के मामले की जांच कर रहा है.

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता जिस ओदश को जारी करने की मांग कर रहें हैं उसे कोर्ट जारी नहीं कर सकता है. पीठ ने कहा कि याचिका कानून का उल्लंघन करने वाले कुछ खास लोगों को इंगित करती हैं. इसीलिए पीठ ने इस मामले को संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाने की मंजूरी देते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया.

बताया जा रहा है कि यह याचिका विधि की एक छात्र ने दायर की थी. कोर्ट ने कहा कि जब याचिकाकर्ता प्रतिनिधित्व करता है तो उसे और संबंधित अधिकारियों द्वारा ऐसे मामलों के लिए लागू कानून, नियम, विनियम और सरकारी नीति के मुताबिक और व्यावहारिक रूप से जितना संभव हो वैसा निर्णय लेना चाहिए.

कानून की छात्रा ने अपनी याचिका में दावा किया है कि उसने पिछले साल भी बकरीद ईद से पहले अधिकारियों के समझ एक प्रतिनिधित्व प्रस्तुत किया था लेकिन इस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई और यही कारण है कि उसे हाईकोर्ट में तत्काल याचिका दायर करने पड़ी.

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