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डॉक्टर कफील खान को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत, बोले अब सुकून से अपना काम जारी रखूँगा

डॉ कफील खान पर इलाहाबाद हाई कोर्ट से एक बड़ी खबर सामने आई है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने एक आपराधिक मामले में डॉ कफील खान के खिलाफ दाखिल किये गए आरोपपत्र और उसके संज्ञान के आदेश को सिरे से ख़ारिज कर दीया है. इस आरोपपत्र में डॉ. खान पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध में भड़काऊ भाषण दिया था.

हाईकोर्ट ने कफील के खिलाफ जारी आरोप पत्र और उसके संज्ञान आदेश को रद्द कर दिया है. अदालत ने इसे रद्द करते हुए कहा कि आरोप पत्र दाखिल करने से पहले संबंधित पुलिस अधिकारियों द्वारा आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 196 (ए) के तहत केंद्र या राज्य सरकार या जिला मजिस्ट्रेट से अपेक्षित मंजूरी नहीं हासिल नहीं की थी.

कफील खान को मिली बड़ी राहत

वहीं न्यायमूर्ति गौतम चौधरी ने फैसला सुनाते हुए साफ किया कि केंद्र या राज्य सरकार या फिर जिला मजिस्ट्रेट से CRPC की धारा 196 (ए) के तहत दी गई अनिवार्य अनुमति के बाद ही कोर्ट में चार्जशीट और उसके संज्ञान आदेश पर विचार विमर्श किया जाएगा.

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बता दें कि सीआरपीसी की धारा 196 (ए) कहती है कि केंद्र सरकार या राज्य सरकार या फिर जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी कोर्ट ऐसे मामलों के संज्ञान पर विचार नहीं करेगी जो आईपीसी की धारा 153 ए के तहत दाखिल किये गए हो.

आपको बता दें कि इससे पहले डॉ खान के खिलाफ धारा 153 ए, 153 बी और 505 (2) के तहत प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी. जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार करके जेल में डाल दीया गया था. इसके बाद पुलिस ने इस मामले में अलीगढ़ की एक अदालत के समक्ष 16 मार्च, 2020 को आरोप पत्र पेश किया था.

28 जुलाई, 2020 को सीजेएम अलीगढ़ ने इसका संज्ञान लिया था. जिसे चुनौती देते हुए खान ने याचिका दायर की थी. वहीं इससे पहले खान पर एक मामले को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) का केस दायर किया गया था और उन्हें हिरासत में ले लिया गया था.

जिसके बाद हाई कोर्ट ने उन पर लगे इन संगीन आरोपों को खारिज कर दिया था. वहीं इससे पहले डॉ कफील खान गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के चलते कई बच्चों की मौ’त होने के चलते खबरों में आए थे.

बाल रोग विशेषज्ञ खान को अगस्त 2017 में ऑक्सीजन की कमी के चलते लगभग 60 शिशुओं की मौ’त के मामले में आरोपी मानते हुए सेवा से निलंबित कर दिया गया था. यह मामला अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है.

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