VIDEO: अब खेती-किसानी पर लगेगा 18% जीएसटी?, मोदी सरकार के नए बिल से देश भर के किसान हैं परेशान

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने खेती-किसानी के क्षेत्र में सुधार के उद्देश्य से तीन विधेयक संसद से पास कराए हैं. हालांकि इन बिलों को लेकर देश के कई हिस्सों में किसानों द्वारा वि’रोध प्रदर्शन किये जा रहे हैं. खास तौर पर उतर भारत में इन्हें लेकर किसान आंदोलन उग्र रूप लेता नजर आ रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन बिलों पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मुहर लगा दी हैं इसी के साथ अब यह लागू हो जाएगें.

लेकिन इन बिलों को लेकर चल रहे विरोध के पीछे कारण क्या हैं? विपक्ष द्वारा इन्हें लगातार किसान विरोधी बताया जा रहा हैं. जबकि सरकार का तर्क हैं कि यह किसानों के लिए फायदेमंद हैं और उनकी स्थिति में सुधार के लिए इन्हें लाया जा रहा हैं. सरकार द्वारा लगाए गए यह बिल विधेयक हैं-

  • द फार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फेसिलिटेशन) बिल 2020
  • द फार्मर्स (एम्पॉवरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑफ प्राइज एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेस बिल 2020
  • द एसेंशियल कमोडिटीज (अमेंडमेंट) बिल 2020

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इस बिल को लेकर एक बात तो साफ तौर पर कहीं जा सकती हैं कि इनके लागू होने के बाद किसानों पर जीएसटी सहित कई तरह के टैक्स लद जाएंगे. वहीं दूसरी बात किसानों के साथ धो’खाध’ड़ी हो सकती हैं. तीसरी बात यह कि अगर किसानों के साथ अन्याय होता हैं तो उसकी जिम्मेदारी या भुगतान कौन करेगा यह तय नहीं किया गया हैं.

एमएसपी पर सवाल?

विपक्षी दल और किसानों का आरोप हैं कि इस बिल के चलते न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ख’त्म हो जाएगा. जिस पर केंद्र सरकार के कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि इससे एमएसपी ख’त्म नहीं होगी.

दरअसल यह बिल में कांट्रैक्ट पर खेती कराने की बात कहीं गई हैं. बिल के अनुसार इससे खेती से जुड़े जोखिम किसानों के नहीं, बल्कि एग्रीमेंट करने वाले पर शिफ्ट हो जाएगें. किसान एग्री-बिजनेस करने वाली कंपनियों, होलसेलर्स और बड़े रिटेलर्स से एग्रीमेंट करके आपस में तय कीमत पर उन्हें फसल बेचगें.

जीएसटी के दायरे में आएगी खेती

इससे उनकी मार्केटिंग की लागत भी बचेगी और दलाल ख;त्म होंगे. जिससे किसानों को फसल का उचित मूल्य मिलेगा. जबकि इसे लेकर किसानों का कहना हैं कि अगर खेती में नुकसान होता हैं तो इसका पूरा जिम्मा किसानों पर थोप दिया जाएगा. इसके आलावा किसान की सुरक्षा या पेमेंट मिलने की कोई गारंटी भी सुनिश्चित नहीं हैं.

कुछ भी होगा तो सारे अधिकारी जिला अधिकारी के पास हैं. ऐसे में किसानों के पास या डीएम के पास इतना वक्त नहीं होता हैं वो सिर्फ यही ममाले देख सकें. खेती को कॉर्पोरेट के जरिए अब चलाया जाएगा.

इसके साथ ही इस बिल के जरिए खेती-किसानी को सेवा सेक्टर के तहत लाया जा रहा हैं जो की जीएसटी के दायरे में आता हैं. इसके तहत किसानों पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाएगा. साथ ही बिल में टैक्स को लेकर स्पष्ट नहीं किया गया हैं. ऐसे में अगर टैक्स बढ़ा भी सकती हैं?

साभार- भास्कर

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