VIDEO: कौन हैं खुशबू सुंदर, जो हफ्ते भर पहले कर रही थीं PM नरेंद्र मोदी की आलोचना, अब Congress…

साउथ की मशहूर अभिनेत्री रही खुशबू सुंदर ने कांग्रेस पार्टी छोड़कर सोमवार को भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन कर ली है. बीजेपी ज्वाइन करने के बाद उन्होंने दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात भी की. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से सोमवार को ही सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. जिसके बाद उन्हें कांग्रेस ने तत्काल प्रभाव से राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से ह’टा दिया था.

आपको बता दें कि उन्होंने 200 से ज्यादा दक्षिण भारतीय और बॉलीवुड फिल्मों में कई अहम किरदार निभाए है. 29 सितंबर 1970 को जन्मी खुशबू ने ने एक बाल कलाकार के तौर पर हिंदी फिल्म द बर्निंग ट्रेन (1980) से अपने फ़िल्मी सफर की शुरुआत की थी. इस बाल कलाकार के तौर पर वो नसीब, लावारिस और कालिया जैसी फिल्मों में भी नजर आई.

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उन्होंने 1985 में जानू फिल्म में जैकी श्रॉफ के साथ काम किया, इसके बाद 1990 में आई दीवाना मुझ सा नहीं में भी उन्होंने महत्वपूर्ण रोल निभाया. खुशबू ने मुख्य कलाकार के तौर पर तमिल फिल्मों में खूब नाम कमाया.

उन्होंने तमिल के आलावा मलयालम, कन्नड़ और तेलुगु फिल्मों में भी काम किया है. 50 वर्षीय अभिनेत्री ने अपने करियर में 200 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है. दक्षिण में उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता हैं कि उनके प्रशंसकों ने उन्हें एक मंदिर समर्पित किया है.

साल 2004 में दक्षिण भारतीय फिल्मों की अभिनेत्री ने कांग्रेस का दामन थमा और कहा था कि आखिरकार मैं अपने घर आ गई हूं. कांग्रेस एकमात्र ऐसी पार्टी है जो देश के लोगों को एकजुट कर सकती हैं. लेकिन कांग्रेस ने उन्हें 2014 में ना तो लोकसभा का टिकट दिया और न ही उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनाया.

इससे पहले वो अक्सर ही बीजेपी पर निशाना साध’ती रही है. वो बीजेपी की एक कट्टर आलोचक रही है. लेकिन हाल ही में खुशबू ने कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा कि कुछ तत्व पार्टी के अंदर उच्च पदों पर बैठे है, जिनका जमीनी स्तर पर या सार्वजनिक मान्यता से कोई जुड़ाव नहीं है, वो लोग सिर्फ आदेश दे रहे है.

वहीं कांग्रेस सूत्रों के अनुसार 2019 के लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के कारण वो नाराज चल रही थी. हाल ही में उन्होंने कई मुद्दों पर कांग्रेस के आधिकारिक रुख से अलग राय जाहिर की थी. कुछ ही वक्त पहले आई नई शिक्षा नीति का भी उन्होंने समर्थन किया था जबकि पार्टी इस नई शिक्षा नीति का विरो’ध कर रही हैं.

साभार- जनसत्ता

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