VIDEO: टीपु सुल्तान की वंशज नूर इनायत को लंदन में सम्मान से नवाज़ा गया, जानिए बड़ी वजह

भारतीय मूल की जासूस नूर इनायत खान को लंदन में सम्मानित किया गया हैं. नूर इनायत ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन के लिए कई जोखिम भरे कामों को अंजाम दिया था. भारतीय मूल की इस ब्रिटेश जासूस को ब्रिटेन में ब्लू प्लॉक से सम्मानित किया गया हैं. सेकेंड वर्ल्ड वर के समय नूर इनायत खान उस दौरान के सबसे ताकतवर और खत’रनाक नेता हिटलर के कब्जे वाले स्थान पर वेश बदल कर दाखिल हो गई थीं.

इतना ही नहीं उन्होंने वहां से बड़ी सफाई के साथ कई खुफिया सूचनाएं ब्रिटेन को भेजी, उन्होंने अपनी जा;न पर खेलकर लगातार ब्रिटेन को ख़ुफ़िया जानकारियां भेजी.

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आपको बता दें कि नूर इनायत खान की वंशावली 18वीं सदी के मैसूर के शासक टीपू सुल्तान से सम्बंधित हैं. नूर का जन्म रूस में हुआ था, उनके पिता भारतीय थे जबकि उनकी मां अमेरिकन महिला थी.

जासूस नूर इनायत खान लंदन में मेमोरियल प्लॉक से सम्मानित होने वाले पहली भारतीय मूल की महिला बनी गई हैं. बता दें कि ब्लू प्लॉक पाना ब्रिटेन ही नहीं बल्कि दुनिया में प्रतिष्ठा का विषय है. मध्य लंदन में उनके पूर्व पारिवारिक घर में शुक्रवार को ब्लू प्लाक देकर उन्हें सम्मानित किया गया.

ब्रिटेन की संस्था इंग्‍ल‍िश हेरिटेज ब्‍लू प्‍लाक स्‍कीम से उन विख्यात लोगों और संगठनों को सम्मानित किया जाता हैं जो लंदन में किसी खास बिल्डिंग से जुड़े होते हैं. नूर तत्कालीन ब्रिटिश पीएम विस्टन चर्चिल द्वारा गठित ब्रिटिश सीक्रेट सर्विस में काम करती थी.

नूर इनायत को 1940 में ब्रिटेन ने नाजियों के कब्जे वाले फ्रांस में भेजा था. नूर को रेडियो ऑपरेटिंग में महारत हासिल थी. उन्होंने पेरिस में काम करते हुए जासूसी की जहां हर कदम पर नाजी सैनिकों का पहरा था. लेकिन वो जोखिम भरे माहौल के बीच ही हिलटर के फौजों की जानकारियां लंदन भेजती रही.

उन्होंने सौ-सवा दिनों तक बेश बदलकर नाजियों पर निगरानी रखी जब नाजी फौज को लगा कि उनकी जानकारियां लीक हो रही हैं तो उन्होंने चौकसी बढ़ा दी और आखिरकार नूर को गिरफ्तार कर लिया गया.

नूर को तीन दूसरी महिला एजेंटों के साथ 11 सितंबर 1944 को नाजियों के कंस्ट्रेशन कैंप में भेजा गया था जहां पर उन्हें सिर में गोली मा’र दी गई. नूर ने नाजियों के चंगूल में आने के बाद भी उन्हें कोई खुफिया जानकारी नहीं दी. इससे पहले उनके समर्पण के लिए ब्रिटेन के दूसरे सबसे बड़े सम्मान जॉर्ज क्रॉस से 1949 में नूर को सम्मानित किया गया था.

साभार- आजतक

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