कृषि बिल का विरोध सिर्फ़ पंजाब-हरियाणा में ही क्यों, यूपी, बिहार-एमपी में क्यों नहीं?

संसद के इस सत्र में लोकसभा से कृषि क्षेत्र से जुड़े तीन अहम विधेयक पारित हो गए है. जिनका पंजाब और हरियाणा में जमकर विरोध देखने को मिल रहा है जबकि उत्तरप्रदेश में कहीं-कहीं ही किसान इसका विरोध करते नजर आ रहे है. बीते सालों में किसान आंदोलन को लेकर चर्चा में रहे महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से विरोध की खबरें बहुत ही कम देखने को मिल रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कुछ राज्यों को छोड़कर अन्य राज्यों में इनका उतना विरोध क्यों नहीं हो रहा?

एक तरफ इसे विपक्ष किसान वि’रोधी बता रहा है जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि ये बिल किसानों के हित में है. इन्हीं बिलों के चलते बीजेपी की सहयोगी पार्टी अकाली दल ने पार्टी का साथ छोड़ने का ऐलान किया है. अब बात करते है कि आखिर इस बिल का देश भर में एक सामान वि’रोध या समर्थन देखने को क्यों नहीं मिल रहा है?

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कृषि मामलों के जानकार और हिंदकिसान के मुख्य संपादक हरवीर सिंह ने कहा कि कुछ स्थानों पर विरो’ध प्रदर्शन तेज होने के पीछे की वजह वहां की राजनीति और किसानों के संगठन भी है, इसके आलावा अनाज ख़रीद की सरकारी व्यवस्था से एक मुख्य फैक्टर है.

उन्होंने कहा कि अब तक हुए किसान आंदोलन के केंद्र ज़्यादातर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी रहे है. बात महाराष्ट्र की करें तो यहां अधिकतर पश्चिमी हिस्से में आंदोलन दिखते हैं, जहां गन्ने और प्याज़ की खेती की जाती है.

महाराष्ट्र में गन्ना किसान अधिक हैं और गन्ने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) अपना प्रभाव नहीं डालता क्योंकि गन्ने की खरीद के लिए फेयर एंड रीमुनरेटिव सिस्टम (एफ़आरपी) मौजूद है. वहीं यूपी में ज्यादातर ज़मीन हॉर्टिकल्चर के लिए उपयोग होती है जिसका एमएसपी से कोई लेना-देना नहीं होता है.

वहीं मध्यप्रदेश की बात करें तो ऐसा नहीं है कि यहां आंदोलन या इन बिल का विरोध नहीं हो रहा है, विरोध तो हो रहा है. लेकिन समस्या यह है कि यहां किसानों के मज़बूत संगठन नहीं है. एमपी में मंडियों में तक इसका विरोध किया जा रहा है और मंडी कर्मचारियों ने हड़ताल भी की है.

सीधे तौर पर देखा जाए तो जिन किसानों पर इन बिल का सीधा असर पड़ेगा वो सड़क पर आ गए हैं लेकिन जहां सीधे तौर पर किसान प्रभावित नहीं होगें वहां विरोध उतना अधिक नहीं है. जबकि यह बिल सभी किसानों को प्रभावित करेगा.

कृषि विशेषज्ञदेविंदर शर्मा ने कहा कि सवाल उठता है कि इसका विरोध किसान क्यों कर रहे है? क्योंकि उन्हें लग रहा है कि ये उनके हित में नहीं है. लेकिन इस बिल का विरोध बाजार द्वारा नहीं किया जा रहा है क्योंकि उन्हें इससे लाभ होगा.

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