‘रिया और कंगना के जरिए मीडिया और सरकार जनता से खेल खेल रही है’

चलिए मान लेते हैं कि अबोध सुशांत सिंह को मक्का’र रिया ने न’शे का आदी बनाया. यह भी मान लेते हैं की रिया सुशांत को अपने पिता से फोन पर बात करने नहीं देती थी और यह भी मान लेते हैं ,रिया न’शा करती थी. यह बात भी मान लेते हैं कि बीएमसी ने अभिनेत्री कंगना के ऑफिस के अवै’ध निर्माण को तो’ड़ कर बहुत गलत किया है. चलिए यह भी मान लेते हैं कि कंगना रनौत रीयल क्वीन है और बारह कमां’डो के साथ जब चलती है तो शेरनी लगती है. सारी बातें मान लेते हैं.

लेकिन अब सवाल यह है कि क्या यह सारी बातें इतनी महत्वपूर्ण हैं कि फेसबुक से लेकर पूरा समाज दो भागों में बंट जाए? ऐसा ही हुआ है, एक क्वीन और उसके कमां’डो के साथ खड़ा हुआ है और दूसरा वर्ग रिया के साथ खड़ा है. क्या यह घटना इतनी बड़ी है कि आधे बु’द्धिजी’वी रिया के साथ हूं और आधे कंगना के साथ हूं का त’ख्ती लगाकर खड़े हो जाएं?

rhea and kangana

समाज दो भागों में बंट कर इस खेल का हिस्सा बन चूका है, इसमें किसका हित है? बहुत सारी महत्वपूर्ण बातें जो जनता को जाननी चाहिए थी, वह कंगना और रिया की कृपा से जनता जा’न ही नहीं पा रही है. कंगना को भी लाभ है कि बारह कमां’डो के साथ जब वो चलेगी तो सचमुच की क्वीन लगेगी.

रिया भी सत्ता पक्ष के साथ खड़ी हो सकती है और उसे भी कमां’डो सुविधा मिल सकती है. लेकिन इन बातों से हमें क्या मिलने वाला है?
हमारे देश में प्रलय आया हुआ है. हम सभी लोग लोग एक नाव पर सवार हैं और नाव डगमग डगमग कर रही है. लेकिन इस की बात कोई नहीं करता, करोड़ों बेरोजगार हो गए हैं.

प्रतिदिन लगभग एक लाख लोग कोरोना संक्र’मि’त पाए जा रहे है. छिहत्तर हजार लोग कोरोना के भें’ट चढ़ चुके है. कितने होनहार युवक युवति’यां निरा’श होकर अब तक आ#त्मह#त्या कर चुके है. जीडीपी पाताल में चला गया है. महीनों से चीन हमारी सरहद पर घु’सपै’ठ कर रहा है, हमारी सेना शही’द हो रही है.

सैंकड़ों डॉक्टर कोरोना को भेंट चढ़ गए, मुजफ्फरपुर में एक मासूम के साथ रे#प कर चाकुओं से गोंद कर ह#त्या कर दी गई. रोज सैंकड़ों लड़कियों के साथ दु’ष्क’र्म हो रहे हैं लेकिन करणी सेना का खू’न कभी नहीं खौ’ला. लेकिन बारह कमां’डो प्राप्त एक युवती को साथ देने हजारों गाड़ियों का काफिला लेकर वो राजस्थान से मुंबई पहुंच जाते है, क्यों?

क्योंकि उनके राजनीतिज्ञ आकाओं का यही इशारा है. परंतु इन बातों से किसे मतलब? ब्लू’व्हे’ल एक खेल है, उस खेल में लोगों को इस तरह फंसाया जाता है कि वे अपनी जा#न तक दे देते हैं. हम भारतीयों को भी सुशांत, रिया और कंगना के खेल में फं’सा कर अफीम’ची बनाने की कोशिश की जा रही है ताकि हम असली समस्या से दूर रहें.

कंगना हो या रिया दोनों को मोहरा बनाया जा रहा है केंद्र की सरकार हो या राज्य की, दोनों नाकाम रही है. जनता के प्रश्नों से बचने के लिए दोनों इन दो महिलाओं पीछे छुप गई है ताकि कोई भी उनसे सवाल ना कर सके. उनसे कोई यह न पूछ सके कि जीडीपी इतनी नीचे क्यों चली गई.

इतने कड़े लॉकडाउन के बाद हमारे यहां कोरोना इतना कहर क्यों मचा हुआ है? बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए सरकार क्या सोच रही है? यहां तक कि पाकिस्तान जिसके बारे में हमारे देश की मीडिया कहती थी कोरोना की मौ#त मरेगा पाकिस्तान, उसने भी अपने देश मे बहुत कम लॉकडाउन करके कोरोना को कैसे कंट्रो’ल में कर लिया हैं?

इन सभी सवालों से बचने के लिए केंद्र और राज्य की सरकार मीडिया के साथ मिलकर खेल खेल रही है और हम लोग उसके मोहरे बनते जा रहे हैं. तभी तो आसपास म#रने वाले के लिए असंवेदनशील हो गए हैं और एक नशे’ड़ी की आ’त्मह’त्या करने पर उद्देलित हो रहे हैं.

कंगना हो या रिया दो’षी है या नि’र्दोष, क्या यह देश की विकटतम समस्या है? ग़रीबों के लाखों बच्चे छह महीने से कॉ’पी और पेंसिल नहीं पकड़ पाए हैं, यह ग’म्भी’र समस्या है और यह बात हमारे देश को ग’र्त में ले जा सकती है, लेकिन उस पर कोई उद्वेलित नहीं हो रहा है.

सुजाता चौधरी (यह लेखिका के निजी विचार हैं)

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