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अंजना, रजत शर्मा, सुधीर चौधरी और दीपक चौरसिया जैसे पत्रकारों को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले को लेकर भारतीय मीडिया को जमकर फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी के दौरान मीडिया को लेकर कहा कि मीडिया हर खबर को साम्प्रदायिक रूप देने की कोशिशों में लगा रहता है. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमना ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिए फैलाई जा रही फेक न्यूज़ पर भी अपनी चिंता जाहिर की है.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कोरोना के शुरुआत में तबलीगी जमात को लेकर मीडिया द्वारा की गई रिपोर्टिंग के मामले में एक केस पर सुनवाई की और कहा कि तबलीगी जमात से जुडी खबरों को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है.

तबलीगी जमात को लेकर फैलाया गया झूठ

चीफ जस्टिस एनवी रमना की अगुवाई वाली बेंच ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई की. जमीयत ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार को फेक न्यूज़ के प्रसार को रोकने के लिए निर्देश जारी करने की मांग की थी.

Tablighi Jamaat

याचिका में तबलीगी जमात के निजामुद्दीन मरकज में हुई एक धार्मिक सभा से जुडी फर्जी खबरों के प्रसार को रोकने की मांग करते हुए उनके खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्देश देने की मांग कोर्ट से की गई थी.

इस दौरान कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म फर्जी खबरों के अड्डे बने हुए है और यह जजों के सवालों के जवाब तक नहीं देते है. कोर्ट ने कहा कि ऐसे सभी डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सिर्फ शक्तिशाली लोगों की सुनने में लगे हुए है और न्यायिक संस्थानों के प्रति कोई जवाबदेही तय नहीं है.

बेंच ने अपने बयान में आगे कहा कि वेब पोर्टल किसी भी चीज से शासित नहीं है. खबरों को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा है और यही समस्या है. इससे देश का नाम खराब होता है. वेब पोर्टलों और YouTube चैनलों पर फर्जी खबरों और बदनामी को लेकर कोई नियंत्रण नहीं है.

अगर आप यूट्यूब खोलकर देखते है तो यहां आपको खुलेआम फर्जी खबरें प्रसारित होती मिलेगी. यूट्यूब पर कोई भी चैनल शुरू कर सकता है. इस पर सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि नए सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 में इस सब का ख्याल रखा जाएगा.

आपको बता दें कि कोरोना वायरल की पहली लहर के दौरान तबलीगी जमात के मरकज में हुए एक कार्यक्रम को लेकर काफी विवाद खड़ा हो गया है. इसे लेकर मीडिया के कई झूठी और फर्जी खबरें चलाई थी. इस बीच जमात से जुड़े कई लोगों पर मामले दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था.

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