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तालिबान प्रवक्ता ने बताया कैसी होगी उनके शासन में अफ़ग़ानिस्तान की महिलाओं की ज़िंदगी, इस्लामिक कानून को लेकर कहीं ये बात

अफगानिस्तान अब तालिबान के कब्जे में आ चूका है. इसके बाद से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तालिबानी शासन के दौरान अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की जा रही है. हर तरह यही सवाल है कि तालिबानी शासन में महिलाओं की जिन्दगी कैसी होगी? पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश और यूएन महासचिव एंटोनियो गुटरेश ने भी महिलाओं की स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की हैं.

दुनिया भर के नेताओं, विशेषज्ञों और तमाम हस्तियों द्वारा तालिबानी शासन के दौरान महिलाओं की जिन्दगी को लेकर जाहिर की गई चिंताओं पर तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने तालिबान का पक्ष रखा है.

तालिबान का यह शासन पिछले से कितना अलग होगा

बीबीसी ने हाल ही में तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन का इंटरव्यू हुआ, जिसमें शाहीन ने महिलाओं को काम करने और पढ़ाई करने की आज़ादी देने की बात कहीं. बीबीसी रिपोर्संटर याल्दा हकीम से हुई बातचीत के कुछ अंश.

Suhail Shaheen

क्या इस बार के तालिबानी शासन और पिछले दौर के तालिबानी शासन की अपेक्षा महिलाओं की स्थिति बेहतर होगी. इस सवाल का साफ जवाब देने से तालिबान प्रवक्ता लगातार बचते नजर आए.

याल्दा हकीम ने सवाल किया कि क्या तालिबानी सरकार में महिलाएं न्यायाधीश बन पाएंगी? इस पर शाहीन ने कहा कि न्यायाधीश तो होंगे इसमें कोई दो राय नहीं है. लेकिन महिलाओं को सहयोग देने का काम दिया जा सकता है. उन्हें और क्या काम मिलेगा ये भविष्य की सरकार पर निर्भर होगा.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि स्कूल ऑफिस आदि के लिए यूनिफ़ॉर्म तय की जाएगी. तालिबानी शासन शिक्षा क्षेत्र के लिए काम करेगा. लेकिन एक नीति स्पष्ट होगी कि महिलाओं को काम करने और पढ़ाई करने की पूरी आज़ादी दी जाएगी.

महिलाओं पर क्या बोले तालिबान प्रवक्ता

यह पूछे जाने पर कि पहले और अब के तालिबानी शासन में क्या अलग होगा? क्या महिलाओं को पहले की तरह बाहर जाने के लिए अपने पिता, भाई या पति की मंजूरी लेनी होगी?

इस पर सुहैल शाहीन ने कहा कि बिल्कुल वो इस्लामिक क़ानून के मुताबिक सब कुछ कर सकेगी. पहले भी सड़कों पर महिलाओं को अकेले चलते देखा जा सकता था.

बीबीसी संवाददाता ने कहा कि पहले महिलाओं के अकेले घर से निकलने पर धार्मिक पुलिस उन्हें पिटती थी. महिलाऐं बताती है कि वो पहले पिता, भाई और पति के साथ ही घर से बाहर निकल पाती थी. इस पर सुहैल शाहीन ने बताया कि ऐसा नहीं था और आगे भी ऐसा नहीं किया जाएगा.

तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि महिलाओं को डरने की जरूरत नहीं है. हम उनकी इज्जत, संपत्ति, कामकाज एवं पढ़ाई करने के अधिकार की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है. काम और पढाई को लेकर इस बार स्थिति पिछली बार से बेहतर होगी.

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